नवरात्रि का प्रथम दिन — एक विस्मृत देवी की कथा
न वह अग्नि थी,
न वायु,
न किसी रूप में बंधी हुई शक्ति…
वह थी— अनाहिता।
एक ऐसी देवी
जिसे देखा नहीं जा सकता,
सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
और शायद…
वह आज भी
आपके भीतर कहीं मौन बैठी है। 🔥
न वह अग्नि थी,
न वायु,
न किसी रूप में बंधी हुई शक्ति…
वह थी— अनाहिता।
एक ऐसी देवी
जिसे देखा नहीं जा सकता,
सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
और शायद…
वह आज भी
आपके भीतर कहीं मौन बैठी है। 🔥