नवरात्रि का प्रथम दिन — एक विस्मृत देवी की कथा
न वह अग्नि थी,
न वायु,
न किसी रूप में बंधी हुई शक्ति…
वह थी— अनाहिता।
एक ऐसी देवी
जिसे देखा नहीं जा सकता,
सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
और शायद…
वह आज भी
आपके भीतर कहीं मौन बैठी है। 🔥
न वह अग्नि थी,
न वायु,
न किसी रूप में बंधी हुई शक्ति…
वह थी— अनाहिता।
एक ऐसी देवी
जिसे देखा नहीं जा सकता,
सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
और शायद…
वह आज भी
आपके भीतर कहीं मौन बैठी है। 🔥
हजारों वर्ष पहले, जब ऋषि वेदों का उच्चारण करते थे, तब एक देवी का नाम आकाश में गूंजता था — देवी अदिति।
वह केवल देवताओं की माता ही नहीं थीं, बल्कि अनंत आकाश और स्वतंत्रता की प्रतीक थीं। उन्हीं के गर्भ से जन्मे थे आदित्य — वे देवता जो इस ब्रह्मांड की व्यवस्था को संभालते हैं।
लेकिन समय के साथ, इतिहास की धूल ने इस महान देवी के नाम को धीरे-धीरे ढक दिया। आज बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदू धर्म की सबसे प्राचीन मातृशक्तियों में से एक थीं — देवी अदिति।
और शायद हर बार जब हम अनंत आकाश की ओर देखते हैं…
तो उसी अनंतता की झलक देखते हैं, जिसे हमारे ऋषियों ने अदिति कहा था।