होलिका दहन: जब अग्नि भी सच्ची भक्ति के सामने झुक गई
होलिका और प्रह्लाद की कथा केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि भक्ति की अटूट शक्ति का प्रतीक है। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा अग्नि की लपटों में भी सुरक्षित रहती है। होलिका अहंकार और दुरुपयोग की प्रतीक है, जबकि प्रह्लाद अडिग विश्वास और पूर्ण समर्पण का स्वरूप हैं। होलिका दहन हमें याद दिलाता है कि अंततः विजय सदैव सत्य और भक्ति की ही होती है।










